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Vitamin B12 Defic iency : दिमाग़, नसों और ख़ून की सेहत के लिए ज़रूरी Vitamin B12 एक बहुत अहम विटामिन है, जो दिमाग़ ( Brain ), नसों ( Aasab ) और ख़ून ( Khoon ) की सेहत के लिए बेहद ज़रूरी माना जाता है। आधुनिक चिकित्सा ( Modern Medicine ) और यूनानी चिकित्सा ( Unani Tib ) — दोनों ही Vitamin B12 की कमी को गंभीर समस्या मानती हैं।   Vitamin B12 क्या करता है? दिमाग़ की नसों को मज़बूत करता है याददाश्त ( Memory ) बेहतर रखता है ख़ून में RBC बनने में मदद करता है नसों की कमजोरी ( Aasab ki kamzori ) से बचाता है ⚠️ Vitamin B12 Deficiency के लक्षण ( Symptoms ) अगर शरीर में Vitamin B12 कम हो जाए तो ये लक्षण दिख सकते हैं: हाथ–पैर में झनझनाहट कमजोरी और थकान चक्कर आना भूलने की बीमारी आंखों के आगे अंधेरा जीभ में जलन दिल की धड़कन तेज़ ख़ून की कमी ( Anemia ) 👉 यूनानी में इसे “ Aasab aur Khoon ki kamzori ” कहा जाता है। 🩺 किन बीमारियों में B12 कम हो सकता है? निम्न बीमारियों में Vitamin B12 की कमी आम पाई जाती है: Diabetes (शुगर) Thyroid ⇨⇨ Gastritis / Acidity पेट की पुरानी बीमारी Liver Disease Kidney...
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 जिंदगी और मौत: अटल सच्चाई, अनलिमिटेड सवाल और जीने का सबसे स्मार्ट तरीका! मेराज उद्दीन सिद्दीकी  इस लेख में हम क्या जानेगे: जीवन का सच, मौत का मनोविज्ञान, सार्थक जीवन, प्रेरणा, अस्तित्ववाद, अनिश्चितता, जीवन प्रबंधन, युवा और जीवन, मौत का सामना, अनमोल जीवन। 💡 कहानी का पहला पन्ना: हम सब एक रेस में हैं सोचो, हम सब एक जबरदस्त मैराथन दौड़ रहे हैं। हम जानते हैं कि फिनिश लाइन तो आएगी, लेकिन कब, कहाँ, और कैसे—किसी को नहीं पता। यही तो है "जीवन" और "मौत" का खेल। एक तरफ धड़कती, दौड़ती जिंदगी है, उम्मीदों से भरी; दूसरी तरफ एक शांत, अनजाना पड़ाव जिसे "मौत" कहते हैं। हम में से ज्यादातर लोग 19 से 45 साल के बीच अपनी लाइफ की सबसे एक्टिव स्टेज में होते हैं। हम करियर बनाते हैं, रिश्ते निभाते हैं, सपने देखते हैं, और खूब एंजॉय करते हैं। इस सबके बीच, मौत का ख्याल अक्सर पीछे धकेल दिया जाता है। लेकिन क्या होगा अगर हम इस अटल सच्चाई को एक दुश्मन की बजाय एक "पावरफुल मोटिवेटर" मान लें? इस लेख में हम इसी पर बात करेंगे, बिना किसी धर्म-कर्म के झंझट के, सिर्फ लॉजिक और लाइफ के ए...
पसली में दर्द: कारण, लक्षण, इलाज, घरेलू उपाय और आयुर्वेदिक उपचार Updated: | Estimated read: 6 min पसली में दर्द (Pain in Ribs)  एक सामान्य समस्या है। अक्सर यह मांसपेशियों के खिंचाव, गैस, लगातार खांसी या चोट की वजह से होता है। इस लेख में आप पाएँगे: प्रमुख कारण, लक्षण, घरेलू इलाज, आयुर्वेदिक विकल्प, भोजन-परहेज और कब डॉक्टर से मिलना चाहिए। 1. पसली में दर्द क्यों होता है? (मुख्य कारण) मांसपेशियों में खिंचाव:  भारी सामान उठाने या अचानक मूवमेंट से। गैस और एसिडिटी:  पेट में गैस छाती तक दबाव बनाती है। लंबी या तेज खांसी:  छाती की मांसपेशियाँ तनाव में आ जाती हैं। फेफड़ों के संक्रमण (Pneumonia):  सांस लेने पर बढ़ता हुआ तेज दर्द। चोट या फ्रैक्चर:  चोट लगने पर तीव्र और चुभने जैसा दर्द। 2. पसली में दर्द के लक्षण (Symptoms) सांस लेने पर तेज दर्द या जकड़न छाती या बगल में खिंचाव महसूस होना खांसी/हिलने पर दर्द बढ़ना छूने पर संवेदना में बढ़ोतरी कभी-कभी बुखार या थकान के साथ 3. कब डॉक्टर से मिलें? (Emergency Signs) डॉक्टर को तुरंत दिखाएँ अगर: सांस लेने में दिक्कत हो खांसी ...

हिंदी जबान में उर्दू शब्दों से बढ़ती सुंदरता-"हिंदी और उर्दू का ऐतिहासिक संबंध"। मेराज उद्दीन सिद्दीकी

 "हिंदी और उर्दू का ऐतिहासिक संबंध"- हिंदी जबान में उर्दू शब्दों से बढ़ती सुंदर ता                                                     मेराज उद्दीन सिद्दीकी✐ भा षा केवल संवाद का   माध्यम नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कृति, इतिहास और सभ्यता की पहचान होती है। हिंदी और उर्दू का रिश्ता भी इसी सांस्कृतिक संगम का प्रतीक है। दोनों भाषाएँ न सिर्फ़ एक ही मिट्टी से उपजी हैं, बल्कि भावनाओं, संवेदनाओं और अभिव्यक्तियों को सँवारने में एक-दूसरे की पूरक भी हैं। "हिंदी और उर्दू का रिश्ता सिर्फ भाषा का नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति का भी है। जानिए इन दोनों भाषाओं की समानताएँ, अंतर और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इस लेख में।" "हिंदी और उर्दू का विकास: एक सांस्कृतिक यात्रा" हिंदी और उर्दू का संबंध हिंदी और उर्दू का इतिहास हिंदी और उर्दू में अंतर हिंदी और उर्दू की समानताएँ हिंदी और उर्दू का विकास एक ही दिल, दो नाम  हिंदी-उर्दू के इस गहरे संबंध को एक मशहूर शेर बखूबी बया...

सर्दी खत्म तो स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखें

सर्दी खत्म तो स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखें! मेराज उद्दीन सिद्दीकी  सर्दी का मौसम खत्म होते ही मौसम बदलने लगता है, और यह समय स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। बदलते मौसम में शरीर का तापमान और इम्यून सिस्टम दोनों प्रभावित होते हैं। इस दौरान सावधानी बरतना और स्वस्थ आदतें अपनाना जरूरी है। 1. इम्यूनिटी मजबूत करें मौसम बदलते समय इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है। इसके लिए: विटामिन C से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं, जैसे संतरा, आंवला और नींबू। अदरक, शहद और तुलसी का सेवन करें। प्रोटीन युक्त आहार जैसे दाल, अंडा, और पनीर लें। 2. मौसम के अनुसार कपड़े पहनें सर्दी और गर्मी के बीच का समय होने के कारण हल्के और गर्म कपड़ों का संतुलन बनाए रखें। सुबह-शाम हल्की ठंड से बचने के लिए जैकेट या हल्का स्वेटर पहनें। 3. पानी की मात्रा बढ़ाएं सर्दियों में पानी कम पीने की आदत हो जाती है, लेकिन बदलते मौसम में शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए: दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। नींबू पानी या नारियल पानी का सेवन करें। 4. मौसम के अनुकूल आहार लें सीजनल फल और सब्जियां: गाजर, चुकंदर, और पपीता जैसे ताजे फल-सब्जियों क...

80- 90 की मीठी यादें

80- 90  मीठी यादें  लिज्जत की लज्जत और सफऱ सुजीत द्विवेदी       लिज्जतपापड का विज्ञापन ग्रुप के सभी  ने बचपन में डीडी पर देखा  होगा और और लिज्जत पापड़ को  बड़े चाव से खाया भी होगा आप को यह भी पता होगा । लिज्जत पापड़ भी अमूल दूध की तरह एक सहकारी आंदोलन की उपज है। जिसे हजारों लोगों ने मिलजुल कर इस बिजनेस को खड़ा किया और सफल बनाया। जैसे दूध के बिजनेस में  पुरुषों के साथ महिलाएं भी  समान भागीदार हैं, वहीं लिज्ज़त पापड़ पूरी तरह से महिला सशक्ति करण का सबसे बड़ा उदाहरण है ।  क्या है लिज्जत पापड़ की कहानी...??? इस छोटी सी कहानी के जरिए समझते हैं । सन 1959 में कुल 07 गुजराती महिलाओं के द्वारा मात्र 80 रुपये से लिज्जत पापड़ शुरू किया गया, जिसका पहले दिन का मुनाफा 50 पैसे था। उस समय में 50 पैसे 07 महिलाओं के लिए दिहाड़ी के हिसाब से बड़ी रकम थी। दूसरे दिन दूगुना यानी दो किलो पापड़ बेला गया जिससे इन्हें 01 रुपये की बचत हुई। अब तो ये बात सब महिलाओं में आग की तरह फैल गई और कुछ और महिलाएं आ जुड़ी। खास बात ये है कि आज भी इस उद्योग का कोई एक मालिक नहीं है....

मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं*

 *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* एक गुमनाम शायर की कविता। बिस्तरों पर अब सलवटें नहीं पड़ती  ना ही इधर उधर छितराए हुए कपड़े हैं रिमोट के लिए भी अब झगड़ा नहीं होता  ना ही खाने की नई नई फ़रमायशें हैं *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* सुबह जल्दी उठने के लिए भी नहीं होती मारा मारी घर बहुत बड़ा और सुंदर दिखता है  पर हर कमरा बेजान सा लगता है  अब तो वक़्त काटे भी नहीं कटता  बचपन की यादें कुछ दिवार पर फ़ोटो में सिमट गयी हैं  *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* अब मेरे गले से कोई नहीं लटकता  ना ही घोड़ा बनने की ज़िद होती है खाना खिलाने को अब चिड़िया नहीं उड़ती  खाना खिलाने के बाद की तसल्ली भी अब नहीं मिलती  ना ही रोज की बहसों और तर्कों का संसार है ना अब झगड़ों को निपटाने का मजा है  ना ही बात बेबात गालों पर मिलता दुलार है  बजट की खींच तान भी अब नहीं है *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* पलक झपकते ही जीवन का स्वर्ण काल निकल गया  पता ही नहीं चला  इतना ख़ूबस...