Skip to main content

Posts

Showing posts from March, 2023

80- 90 की मीठी यादें

80- 90  मीठी यादें  लिज्जत की लज्जत और सफऱ सुजीत द्विवेदी       लिज्जतपापड का विज्ञापन ग्रुप के सभी  ने बचपन में डीडी पर देखा  होगा और और लिज्जत पापड़ को  बड़े चाव से खाया भी होगा आप को यह भी पता होगा । लिज्जत पापड़ भी अमूल दूध की तरह एक सहकारी आंदोलन की उपज है। जिसे हजारों लोगों ने मिलजुल कर इस बिजनेस को खड़ा किया और सफल बनाया। जैसे दूध के बिजनेस में  पुरुषों के साथ महिलाएं भी  समान भागीदार हैं, वहीं लिज्ज़त पापड़ पूरी तरह से महिला सशक्ति करण का सबसे बड़ा उदाहरण है ।  क्या है लिज्जत पापड़ की कहानी...??? इस छोटी सी कहानी के जरिए समझते हैं । सन 1959 में कुल 07 गुजराती महिलाओं के द्वारा मात्र 80 रुपये से लिज्जत पापड़ शुरू किया गया, जिसका पहले दिन का मुनाफा 50 पैसे था। उस समय में 50 पैसे 07 महिलाओं के लिए दिहाड़ी के हिसाब से बड़ी रकम थी। दूसरे दिन दूगुना यानी दो किलो पापड़ बेला गया जिससे इन्हें 01 रुपये की बचत हुई। अब तो ये बात सब महिलाओं में आग की तरह फैल गई और कुछ और महिलाएं आ जुड़ी। खास बात ये है कि आज भी इस उद्योग का कोई एक मालिक नहीं है....