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हिंदी जबान में उर्दू शब्दों से बढ़ती सुंदरता-"हिंदी और उर्दू का ऐतिहासिक संबंध"। मेराज उद्दीन सिद्दीकी

 "हिंदी और उर्दू का ऐतिहासिक संबंध"- हिंदी जबान में उर्दू शब्दों से बढ़ती सुंदर ता                                                     मेराज उद्दीन सिद्दीकी✐ भा षा केवल संवाद का   माध्यम नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कृति, इतिहास और सभ्यता की पहचान होती है। हिंदी और उर्दू का रिश्ता भी इसी सांस्कृतिक संगम का प्रतीक है। दोनों भाषाएँ न सिर्फ़ एक ही मिट्टी से उपजी हैं, बल्कि भावनाओं, संवेदनाओं और अभिव्यक्तियों को सँवारने में एक-दूसरे की पूरक भी हैं। "हिंदी और उर्दू का रिश्ता सिर्फ भाषा का नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति का भी है। जानिए इन दोनों भाषाओं की समानताएँ, अंतर और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इस लेख में।" "हिंदी और उर्दू का विकास: एक सांस्कृतिक यात्रा" हिंदी और उर्दू का संबंध हिंदी और उर्दू का इतिहास हिंदी और उर्दू में अंतर हिंदी और उर्दू की समानताएँ हिंदी और उर्दू का विकास एक ही दिल, दो नाम  हिंदी-उर्दू के इस गहरे संबंध को एक मशहूर शेर बखूबी बया...

मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं*

 *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* एक गुमनाम शायर की कविता। बिस्तरों पर अब सलवटें नहीं पड़ती  ना ही इधर उधर छितराए हुए कपड़े हैं रिमोट के लिए भी अब झगड़ा नहीं होता  ना ही खाने की नई नई फ़रमायशें हैं *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* सुबह जल्दी उठने के लिए भी नहीं होती मारा मारी घर बहुत बड़ा और सुंदर दिखता है  पर हर कमरा बेजान सा लगता है  अब तो वक़्त काटे भी नहीं कटता  बचपन की यादें कुछ दिवार पर फ़ोटो में सिमट गयी हैं  *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* अब मेरे गले से कोई नहीं लटकता  ना ही घोड़ा बनने की ज़िद होती है खाना खिलाने को अब चिड़िया नहीं उड़ती  खाना खिलाने के बाद की तसल्ली भी अब नहीं मिलती  ना ही रोज की बहसों और तर्कों का संसार है ना अब झगड़ों को निपटाने का मजा है  ना ही बात बेबात गालों पर मिलता दुलार है  बजट की खींच तान भी अब नहीं है *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* पलक झपकते ही जीवन का स्वर्ण काल निकल गया  पता ही नहीं चला  इतना ख़ूबस...