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एक बार अमेरिका में कैलीफोर्निया की सड़कों के किनारे पेशाब करते हुए देख एक बुजुर्ग आदमी को पुलिसवाले पकड़ कर उनके घर लाए और उन्हें उनकी पत्नी के हवाले करते हुए निर्देश दिया कि वो उस शक़्स का बेहतरीन ढंग से ख़याल रखें औऱ उन्हें घर से बाहर न निकलने दें । रोनाल्ड रीगन एक याद और सबक– पेशकश  मेराज उद्दीन सिद्दीकी दरअसल वो बुजुर्ग बिना बताए कहीं भी औऱ किसी भी वक़्त घर से बाहर निकल जाते थे और ख़ुद को भी नहीं पहचान पाते थे! बुजुर्ग की पत्नी ने पुलिस वालों को शुक्रिया कहा और अपने पति को प्यार से संभालते हुए कमरे के भीतर ले गईं।  पत्नी उन्हें बार बार समझाती रहीं कि तुम्हें अपना ख्याल रखना चाहिए। ऐसे बिना बताए बाहर नहीं निकल जाना चाहिए। तुम अब बुजुर्ग हो गए हो, साथ ही तुम्हें अपने गौरवशाली इतिहास को याद करने की भी कोशिश करनी चाहिए। तुम्हें ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए जिससे शर्मिंदगी महसूस हो! जिस बुजुर्ग को पुलिस बीच सड़क से पकड़ कर उन्हें उनके घर ले गई थी, वो किसी ज़माने में अमेरिका के जाने-माने फिल्मी हस्ती थे। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए तरसते थे। उनकी लोकप्रियता का आलम ये था कि उसी के दम पर ...

#कबीर"और पगड़ी का मोल

#कबीर"और पगड़ी का मोल       # कबीर"और पगड़ी का मोल Meraj Uddin SiddiquI Merajjourno@gmail.com एक बार कबीर जी ने बड़ी कुशलता से पगड़ी बनाई।  झीना- झीना कपडा बुना और उसे गोलाई में लपेट कर पगड़ी बनाई। पगड़ी को हर कोई बड़ी शान से अपने सिर सजाता हैं।  यह नई नवेली पगड़ी लेकर  कबीर जी दुनिया की हाट में जा बैठे।  ऊँची- ऊँची पुकार उठाई- 'शानदार पगड़ी! जानदार पगड़ी! दो टके की भाई! दो टके की भाई!' एक खरीददार निकट आया। उसने घुमा- घुमाकर पगड़ी का निरीक्षण किया।  फिर कबीर जी से प्रश्न किया- 'क्यों महाशय एक टके में दोगे क्या?'  कबीर जी ने अस्वीकार कर दिया- 'न भाई! दो टके की है। दो टके में ही सौदा होना चाहिए।'  खरीददार भी नट गया।  पगड़ी छोड़कर आगे बढ़ गया। यही प्रतिक्रिया हर खरीददार की रही। सुबह से शाम हो गई।  कबीर जी अपनी पगड़ी बगल में दबाकर खाली जेब वापिस लौट आए।  थके- माँदे कदमों से घर में प्रवेश करने ही वाले थे कि तभी एक पड़ोसी से भेंट हो गई।  उसकी दृष्टि पगड़ी पर पड गई। 'क्या हुआ संत जी, इसकी बिक्री नहीं हुई ?   प...