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सर्दी खत्म तो स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखें

सर्दी खत्म तो स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखें! मेराज उद्दीन सिद्दीकी  सर्दी का मौसम खत्म होते ही मौसम बदलने लगता है, और यह समय स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। बदलते मौसम में शरीर का तापमान और इम्यून सिस्टम दोनों प्रभावित होते हैं। इस दौरान सावधानी बरतना और स्वस्थ आदतें अपनाना जरूरी है। 1. इम्यूनिटी मजबूत करें मौसम बदलते समय इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है। इसके लिए: विटामिन C से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं, जैसे संतरा, आंवला और नींबू। अदरक, शहद और तुलसी का सेवन करें। प्रोटीन युक्त आहार जैसे दाल, अंडा, और पनीर लें। 2. मौसम के अनुसार कपड़े पहनें सर्दी और गर्मी के बीच का समय होने के कारण हल्के और गर्म कपड़ों का संतुलन बनाए रखें। सुबह-शाम हल्की ठंड से बचने के लिए जैकेट या हल्का स्वेटर पहनें। 3. पानी की मात्रा बढ़ाएं सर्दियों में पानी कम पीने की आदत हो जाती है, लेकिन बदलते मौसम में शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए: दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। नींबू पानी या नारियल पानी का सेवन करें। 4. मौसम के अनुकूल आहार लें सीजनल फल और सब्जियां: गाजर, चुकंदर, और पपीता जैसे ताजे फल-सब्जियों क...

80- 90 की मीठी यादें

80- 90  मीठी यादें  लिज्जत की लज्जत और सफऱ सुजीत द्विवेदी       लिज्जतपापड का विज्ञापन ग्रुप के सभी  ने बचपन में डीडी पर देखा  होगा और और लिज्जत पापड़ को  बड़े चाव से खाया भी होगा आप को यह भी पता होगा । लिज्जत पापड़ भी अमूल दूध की तरह एक सहकारी आंदोलन की उपज है। जिसे हजारों लोगों ने मिलजुल कर इस बिजनेस को खड़ा किया और सफल बनाया। जैसे दूध के बिजनेस में  पुरुषों के साथ महिलाएं भी  समान भागीदार हैं, वहीं लिज्ज़त पापड़ पूरी तरह से महिला सशक्ति करण का सबसे बड़ा उदाहरण है ।  क्या है लिज्जत पापड़ की कहानी...??? इस छोटी सी कहानी के जरिए समझते हैं । सन 1959 में कुल 07 गुजराती महिलाओं के द्वारा मात्र 80 रुपये से लिज्जत पापड़ शुरू किया गया, जिसका पहले दिन का मुनाफा 50 पैसे था। उस समय में 50 पैसे 07 महिलाओं के लिए दिहाड़ी के हिसाब से बड़ी रकम थी। दूसरे दिन दूगुना यानी दो किलो पापड़ बेला गया जिससे इन्हें 01 रुपये की बचत हुई। अब तो ये बात सब महिलाओं में आग की तरह फैल गई और कुछ और महिलाएं आ जुड़ी। खास बात ये है कि आज भी इस उद्योग का कोई एक मालिक नहीं है....

मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं*

 *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* एक गुमनाम शायर की कविता। बिस्तरों पर अब सलवटें नहीं पड़ती  ना ही इधर उधर छितराए हुए कपड़े हैं रिमोट के लिए भी अब झगड़ा नहीं होता  ना ही खाने की नई नई फ़रमायशें हैं *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* सुबह जल्दी उठने के लिए भी नहीं होती मारा मारी घर बहुत बड़ा और सुंदर दिखता है  पर हर कमरा बेजान सा लगता है  अब तो वक़्त काटे भी नहीं कटता  बचपन की यादें कुछ दिवार पर फ़ोटो में सिमट गयी हैं  *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* अब मेरे गले से कोई नहीं लटकता  ना ही घोड़ा बनने की ज़िद होती है खाना खिलाने को अब चिड़िया नहीं उड़ती  खाना खिलाने के बाद की तसल्ली भी अब नहीं मिलती  ना ही रोज की बहसों और तर्कों का संसार है ना अब झगड़ों को निपटाने का मजा है  ना ही बात बेबात गालों पर मिलता दुलार है  बजट की खींच तान भी अब नहीं है *मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं* पलक झपकते ही जीवन का स्वर्ण काल निकल गया  पता ही नहीं चला  इतना ख़ूबस...

कोरोना ठीक करने वाली गोली हुई लॉन्च

कोरोना ठीक करने वाली गोली हुई लॉन्च, 5 दिन का होगा कोर्स;  कितने रुपए में और कैसे खरीद सकते हैं merajjourno@gmail.com मेराज उद्दीन सिद्दीकी । देश में कोरोना का संक्रमण एक बार फिर बढ़ता जा रहा है। पिछले 1 महीने में ओमिक्रॉन के 1700 से ज्यादा मरीजों की पुष्टि हुई है। ऐसे में ज्यादातर लोगों के मन में एक ही सवाल है कि क्या कोविड-19 की कोई दवा नहीं है? अगर है तो, ये आम जनता तक कैसे पहुंचेगी? क्या इसका कोई साइड इफेक्ट है? ऐसी दवा की बिक्री कब और कहां होगी? आपके इन सभी सवालों का हम जवाब देंगे। कोविड-19 के इलाज में उपयोग की जाने वाली एंटीवायरल गोली मोलनुपिरावीर को भारत में आपातकालीन मंजूरी मिलने के बाद सोमवार को लॉन्च कर दिया गया है। मोलनुपिरावीर के अलावा कोवोवैक्स और कॉर्बेवैक्स को भी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मंजूदी दी है। क्या है एंटीवायरल गोली मोलनुपिरावीर? मोलनुपिरावीर का इस्तेमाल कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के इलाज में किया जाता है। ये एक पुनर्निर्माण दवा है, जिसे गोली का आकार दिया गया है। मरीज इसे आसानी से ले सकते है। ये गोली वायरस को शरीर में फैलने से रोकती है और...

वक्त

एक बार अमेरिका में कैलीफोर्निया की सड़कों के किनारे पेशाब करते हुए देख एक बुजुर्ग आदमी को पुलिसवाले पकड़ कर उनके घर लाए और उन्हें उनकी पत्नी के हवाले करते हुए निर्देश दिया कि वो उस शक़्स का बेहतरीन ढंग से ख़याल रखें औऱ उन्हें घर से बाहर न निकलने दें । रोनाल्ड रीगन एक याद और सबक– पेशकश  मेराज उद्दीन सिद्दीकी दरअसल वो बुजुर्ग बिना बताए कहीं भी औऱ किसी भी वक़्त घर से बाहर निकल जाते थे और ख़ुद को भी नहीं पहचान पाते थे! बुजुर्ग की पत्नी ने पुलिस वालों को शुक्रिया कहा और अपने पति को प्यार से संभालते हुए कमरे के भीतर ले गईं।  पत्नी उन्हें बार बार समझाती रहीं कि तुम्हें अपना ख्याल रखना चाहिए। ऐसे बिना बताए बाहर नहीं निकल जाना चाहिए। तुम अब बुजुर्ग हो गए हो, साथ ही तुम्हें अपने गौरवशाली इतिहास को याद करने की भी कोशिश करनी चाहिए। तुम्हें ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए जिससे शर्मिंदगी महसूस हो! जिस बुजुर्ग को पुलिस बीच सड़क से पकड़ कर उन्हें उनके घर ले गई थी, वो किसी ज़माने में अमेरिका के जाने-माने फिल्मी हस्ती थे। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए तरसते थे। उनकी लोकप्रियता का आलम ये था कि उसी के दम पर ...

एक तरफ यूपी की राजनीति में बाहुबली हरिशंकर तिवारी, और दूसरी तरफ आयेंगे तो योगी ही का नारा#YogiReturns

  #UP_Election_2022  #UP_Vidhan_Sabha_Chunav_2022 Meraj Uddin Siddiqui उत्तर प्रदेश में 2022 के चुनाव में अभी 6 महीने की देर है लेकिन सोशल मीडिया पर योगी आदित्यनाथ के समर्थक अभी से ही सरकार की वापसी को लेकर विश्वास से लबरेज दिख रहे हैं. योगी आदित्यनाथ के ऊपर गीतों का सिलसिला आल्हा भोजपुरी बुंदेलखंडी धुनों में तो पहले से ही जारी है लेकिन हाल ही में भोजपुरी सुपरस्टार #दिनेश_लाल_यादव_ निरहुआ ने नए गीत #आएंगे_योगी_ही गीत से हलचल मचा दी है. इस गीत को यूट्यूब फेसबुक और ट्विटर पर एक हफ्ते में करीब 2 मिलियन लोगों ने देखा हैI इसके बाद कई अन्य गायकों ने अपनी अपनी धुन में "आएंगे तो योगी ही" गीत को गाकर सोशल मीडिया पर योगी समर्थकों में जोश और बढ़ा दिया है. निरहुआ के साथ इसी गीत को चर्चित लोक गायक दीपक त्रिपाठी ने अपने अंदाज में गाया है. योगी आदित्यनाथ रिपोर्ट कार्ड पेज पर इसे भी करीब 65000 व्यूज मिल चुके हैं. अन्य पेजेज पर भी लाखों लोग देख रहे हैं. इस गीत में कहा गया है कि "चाहे जितना जोर लगा लो आएंगे तो योगी ही".#YogiReturns इसमें कैसे यूपी का विकास हुआ है, कैसे माफियाओं भ्रष्...

हर शाख पर दीमक का बसेरा है:सुजीत दिवेदी,इंडिया समाचार सेवा

     हर शाख पर दीमक का बसेरा है: सुजीत दिवेदी,इंडिया समाचार सेवा   कुदरत के  मौसम  जब चाहे तब बदल जाते हैं, कभी बारिश तो कभी धूप , कभी ठंडा तो कभी गरम कभी साफ़ तो  कभी धुंधला , कई बार तो अचानक करवट लिए हुए मौसम से एक भ्रम की स्तिथि पैदा हो जाती है कि क्या हो रहा है ,  क्या पहनें और क्या खाये ताकि संतुलन बना रहे।  कुछ ऐसी ही हालत हो चुकी है राजनीति की , रोज़ नयी करवट , अजीब सा माहौल हो जाता है, कभी डर तो कभी  हंसी , कभी तीखी तो अक्सर  कड़वी , एक विषय पर बात करने वालों के अलग अलग सुर और अंदाज़, संतुलन तो  दूर दूर तक नहीं दिखाई देता है, न बातों का , न वादों का , न दावों का , न आरोपों का और न ही आरोपों के  परिप्रेक्ष्य में दी गयी सफाई का। सब अपने आपको ही बेहतर बताने में जुटे हैं , जनता सिर्फ सुनने को मजबूर है।   और तो और जनता को राजनीति के बोल बताते हैं  कि  वो  क्या है ,मसलन तुम हिन्दू हो कि मुसलमान, तुम  सवर्ण हो कि दलित , तुम ब्राह्मण हो की क्षत्रिय मानों कि जनता को पता ही नहीं कि वो क्या है। जाति ...